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चूत की चुदाई नौकर ने की (Chut Ki Chudai Naukar Ne Ki)

नमस्कार पाठकों, मैं प्रितंका अपनी नौकर से चुदाई कहानी लेके आई हूं। उम्मीद है मेरी पिछली सेक्स कहानियां पढ़ कर आपने खूब लंड हिलाया होगा और चूत सहलाई होगी। आशा है मेरी चुदाई की इस कहानी में भी आपको मजा आएगा। तो चलिए शुरू कर रही हूं सेक्स कहानी-

मेरा नाम तो आप लोग जानते है, पीछे मैंने बताया भी है। मैं लुधियाना की रहने वाली हूं, और मेरी उमर 23 साल की है। फिगर मेरा 34-29-36 है, और रंग मेरा गोरा है। मैं इतनी तो सेक्सी हूं, कि कोई भी लड़का मेरा दीवाना बन जाए, और मुझे पाने के लिए कुछ भी कर जाए।

ये बात 2 महीने पहले की है। मुझे ऑफिस से छुट्टी थी, और मैं घर पर बोर हो रही थी। फिर मैंने सोचा क्यों ना मामा-मामी से मिलने जय जाए उनके घर। मैंने मम्मी को बताया, और निकल पड़ी उनके घर के लिए। उनका घर तकरीबन 40 किलोमीटर दूर है, तो वहां बस से जाना पड़ता है। मैंने उनको चलने से पहले सूचना नहीं दी, और मैं उनको सरप्राइस करना चाहती थी।

फिर एक घंटे में मैं वहां पहुंच गई। दरवाजा खटखटाया तो नौकर ने दरवाजा खोला। पूछने पर पता चला कि मामा-मामी तो बाहर गए हुए थे, और घर में कोई नहीं था। जब मामी को फोन किया तो उन्होंने कहां की अब आई हो तो रेस्ट करो, खाओ-पियो, और अगले दिन वो वापस आने वाले थे।

अब मेरे पास पूरा एक दिन था। मैंने उनके नौकर को जो मैं खाना चाहती थी, उसकी फरमाइश कर दी। उसने भी वो सब बना कर मुझे खिलाया। फिर मैं मामा-मामी के रूम में आराम करने चली गई। वहां जाके मुझे नींद नहीं आई, तो मैं ऐसे ही उनके कमरे के सामान के साथ छेड़-छाड़ करने लगी।

तभी मुझे एक पेन ड्राइव दिखी, जिस पर ‘प्राइवेट’ लिखा था। अब ‘प्राइवेट’ लिखा देख कर मुझसे रहा नहीं गया, और मैंने वो ड्राइव टीवी पर लगा दी। उसमें कुछ विडियोज थी। जब मैंने पहली वीडियो चलाई, तो वो एक सेक्स वीडियो थी। उस वीडियो को देख कर मेरा मूड बन गया। मैंने सोचा क्यों ना मामा-मामी के बिस्तर पर लेट कर फिंगरिंग की जाए।

ये सोच कर मैंने जल्दी से दरवाजा बंद किया, और अपने कपड़े उतार कर नंगी हो गई। फिर मैं बिस्तर पर लेट गई, और वीडियो देखते हुए आराम से चूत रगड़ने लगी। मुझे बहुत मजा आने लगा। मैं एक हाथ से चूत रगड़ रही थी, और दूसरे हाथ से अपना चूचा मसल रही थी।

ये सब करते हुए अचानक मेरी टेढ़ी नज़र कमरे की खिड़की पर पड़ी। मैंने देखा वहां पर मामा-मामी का नौकर खड़ा मुझे देख रहा था। उसको देख कर मैं और उत्तेजित हो गई। मेरे मन में आने लगा क्यों ना आज इसका अपने ऊपर चढ़ा कर चुदाई करूं इसके साथ।

उनका नौकर तकरीबन 40-45 साल का था। उसका शरीर भारी था, और वो रंग का बिल्कुल काला था। उसके मुंह पर हल्की दाढ़ी थी, जिसमें उसके सफेद बाल देखे जा सकते थे।‌ फिर मैंने उसको आवाज दी-

मैं: अंकल अंदर आ जाइए। मैंने आपको देख लिया है।

ये सुन कर वो डर गया, और कमरे में आके मुझसे माफी मांगने लगा।

मैंने उससे कहा: माफी मिलेगी, लेकिन पहले सजा मिलेगी।

नौकर: तुम जो सजा दोगी बेटी मुझे मंजूर है।

फिर मैंने बिस्तर पर लेट कर अपनी टांगे खोल दी, और बोली-

मैं: मेरी चूत में बहुत खुजली मची है, इसको चाट कर शांत कर भड़वे।

मेरे मुंह से ये बात सुन कर वो समझ गया कि मैं कितनी बड़ी रंडी थी। उसने झट से अपने कपड़े उतारे, और नंगा हो गया। उसका काला चॉकलेट जैसा लंड काफी अच्छा था साइज में। फिर वो मेरी टांगों के बीच आया, और मेरी चूत को चूसने लगा। मुझे और मजा आने लगा, और मैं उसके सर को अपनी चूत में दबाने लगी। बहुत अच्छी तरह से वो मेरी चूत चूस रहा था। लगता है पुराना खिलाड़ी था।

कुछ देर चूत चुसवाने के बाद मैं बोली: हरामखोर, सिर्फ चूसेगा ही या चोदेगा भी?

वो बोला: साली रंडी, तुझे देखते ही समझ गया था कि तू रांड है। आज तेरी ऐसी चुदाई करूंगा जिससे तेरे जिस्म का ज़र्रा-ज़र्रा मेरे लंड का दीवाना हो जाएगा।

ये बोल कर वो मेरी टांगों के बीच आया, और लंड मेरी चूत पर सेट किया। फिर उसने जोर का धक्का लगाया, जिससे उसका मोटा लंड मेरी चूत की दीवारों को चीरता हुआ पूरा अंदर चला गया। मेरी चीख निकली, तो उसने अपने होंठों से मेरे होंठ बंद कर लिए। फिर वो ताबड़तोड़ मेरी चुदाई करने लगा।

1-2 मिनट के दर्द के बाद मुझे मजा आने लगा। उसकी स्पीड इतनी थी, कि मैं सातवें आसमान पर पहुंचने लगी। मेरी चूत धड़ा-धड़ पानी छोड़ रही थी, और उसका लंड बंदूक की तरह चल रहा था। साथ में वो मेरे होंठों को ऐसे मुंह में खींच रहा था, जैसे उखाड़ कर खा जायेगा।

उस नौकर का भार ज्यादा था, और वो उसका बिल्कुल सही इस्तेमाल करके अपने लंड को मेरी बच्चेदानी तक पहुंचा रहा था। कुछ ही मिनट में मैं झड़ गई, और मेरा बहुत पानी निकला। लेकिन वो अभी झड़ा नहीं था।

फिर उसने अपना लंड चूत से निकाला, और मुझे घुमा कर उल्टी लिटा दिया। उसके बाद उसने मेरे चूतड़ों को काटना शुरू किया, और उन पर थप्पड़ मारे। फिर वो मेरी गांड के चीर में अपनी जीभ फेरने लगा। इससे मुझे एक अलग ही सुकून महसूस हुआ। उसके बाद उसने मेरे चूतड़ों को खोला, और पीछे से ही मेरी चूत पर अपना लंड सेट किया।

फिर एक जोर का धक्का मारा, और पूरा लंड चूत में चला गया। इस पोजीशन में लंड चूत की दीवारों पर ज्यादा रगड़ करता है। इसलिए मुझे दर्द होने लगा। मैं उसको लंड बाहर निकलने के लिए बोलने लगी, तो वो बोला-

नौकर: रंडी, कुतिया, छिनाल, हरामजादी, तेरे जैसी रांड की चूत ऐसे ही ठंडी होती है।

ये बोल कर उसने मेरे सर पर हाथ रखा, और मेरे मुंह को तकिए में दबा दिया। उसके बाद उसने जो स्पीड से धक्के मारे, मैं बता नहीं सकती। पूरा बिस्तर हिलने लग गया, और मेरी तो बैंड ही बज गई। आखिरकार 20 मिनट बाद उसने मेरे अंदर ही अपना माल निकाल दिया, और चला गया।

अब मैं खड़ी भी नहीं हो पा रही थी। फिर जब मैंने बाथरूम में जाके खुद को देखा, तो मेरी गर्दन और चूचों पर उसके दांतों के निशान पड़े हुए थे। मुझे लगा कि इस हालत में मुझे मामा-मामी ने देखा तो गलत समझेंगे।‌ इसलिए मैं कोई काम का बहाना करके वापस आ गई।

दोस्तों मेरी चुदाई कहानी की फीडबैक आप pritankagupta3@gmail.com पर दे सकते है।

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