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मां को स्कूटी चलाना सिखाया-1 (Maa Ko Scooty Chalana Sikhaya-1)

आज मैं आपको मां बेटे की नई सेक्स कहानी सुनाने जा रहा हूं। जिसमें आपको मैं बताऊंगा कि एक मां को अपने बेटे का लंड पसंद आने लगता है, और उसका बेटा भी मौके का फायदा उठाता है, और अपनी मां की चुदाई कर देता है। इसमें मां को अपने बेटे से चुदाई करने में बहुत मजा आता है। अब सीधे कहानी पर आते हैं।

मेरा नाम गर्व है। यह कहानी मेरे कॉलेज के दिनों की है। लगभग मेरी उम्र 21 साल की थी, और मेरी मां लगभग 42 साल की। मैं आपको मेरी मां के बारे में बताता हूं। मेरी मां दिखने में एक-दम गोरी और चिकनी है। बड़े-बड़े बूब्स, बड़ी-बड़ी जांघें, और बड़ी कमर।

मेरे पापा काम से बाहर ही रहते है। उनका ऑफिस में वर्क है, तो वह ऑफिस से घर बहुत लेट आते हैं, लगभग 10-11 बजे तक। वो आते ही सीधे सो जाते हैं। उनको अपनी वाइफ के लिए टाइम ही नहीं है।

एक बार की बात है। हम सब बैठ कर खाना खा रहे थे, और मेरे पापा बोले कि, “मुझे ऑफिस के काम से कुछ दिनों के लिए बाहर जाना है।” तो मेरी मम्मी बोली, “तुम तो हमेशा बाहर ही रहते हो। तुमको फैमिली के लिए टाइम ही नहीं रहता।” तो मेरे पापा बोले, “अब क्या करूं? काम तो करना ही पड़ेगा।”

मॉम: आप बाहर चले जाते हो, और गर्व उसके कॉलेज चला जाता है, और मुझे कुछ काम होता है तो मैं कुछ कर नहीं पाती। मार्केट आना-जाना पड़ता है। सब काम रह जाते हैं।

पापा: बेटा तुम मॉम को बाहर ले जाया करो।

मैं: पापा मैं शाम को आता हूं कॉलेज से।

पापा: तुम एक काम क्यों नहीं करती, तुम स्कूटी सीख लो। फिर तुम जब चाहे तब मार्केट जा सकती हो।

मॉम: स्कूटी कौन सिखाएगा मुझे? और मेरे पास टाइम नहीं रहता। मैं सुबह ही फ्री रह पाती हूं।

पापा: बेटा, तुम मम्मी को स्कूटी सिखा दो। वैसे भी तुमको तो स्कूटी आती ही है। तुम सिखाओगे तो सही रहेगा।

मैं: ठीक है मैं सिखा दूंगा।

पापा: वैसे भी मैं सात-आठ दिन के लिए बाहर जा रहा हूं। इतने में तो स्कूटी आ जाएगी तेरी मम्मी को।

मॉम: तो फिर ठीक है। सुबह मैं तुझे उठा दूंगी 7:00 तक। फिर अपन चलेंगे।

रात हो गई थी। रात को मेरे पापा की ट्रेन थी, तो मैं उन्हें छोड़ने रेलवे स्टेशन चला गया। वह रात को निकल गए थे‌। मॉम मेरा इंतजार घर पर कर रही थी। मैं वापस आया तो वो‌ बोली-

मॉम: इतनी देर कहां हो गई?

मैं: ट्रेन लेट हो गई थी थोड़ी, तो वहीं खड़े हुए थे।

मॉम: तो चल अब सो जा, सुबह अपने को जाना भी है। मैं तुझे उठा दूंगी।

मैं: ठीक है, मैं सो जाता हूं।

सुबह 6 बजे मॉम मेरे कमरे में आती है। मैं अक्सर चड्डी पहन कर ही सोता हूं, और आज तक मॉम मुझे कभी उठाने नहीं आई। आज यह कितने सालों में पहली बार हुआ था।

मॉम: चल अब उठ जा, लेट हो जाएंगे। फिर तुझे आकर कॉलेज भी जाना है।

मैं: हां उठ रहा हूं। थोड़ी देर रुक जाओ।

मॉम इतने में मेरा ऊपर से कंबल हटा देती है, और सुबह-सुबह मेरी चड्डी के अंदर से मॉम को मेरा खड़ा उभरता हुआ दिख जाता है। मुझे पता था कि मॉम ने मेरा लंड देख लिया था, पर मॉम अपनी निगाहें उससे हटा लेती है।

वो मुझे बोलती है कि: चल जल्दी रेडी होकर नीचे आजा।

फिर मैं रेडी होकर नीचे जाता हूं।‌ फिर मैं स्कूटी चलाता हूं मॉम मेरे पीछे बैठ जाती है। सुबह-सुबह ठंडा रहती है, तो मॉम मुझसे एक-दम चिपक कर बैठ जाती है। इससे उनके बूब्स मुझे टच हो रहे थे, और मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था। फिर मैं खाली ग्राउंड देखता हूं जहां कोई नहीं था एक-दम सुनसान। मैं वहां जा कर स्कूटी खड़ी कर देता हूं।

मॉम: अब बता कैसे स्कूटी चलानी है?

फिर मैंने स्कूटी के बारे में पूरा बताया, और मॉम के हाथों में स्कूटी दी। जैसे ही मैंने मॉम को स्कूटी दी, उन्होंने एक-दम से रेस दे दी, और उनका बैलेंस बिगड़ गया। स्कूटी आगे जाकर गिर गई। मॉम को ज्यादा चोट नहीं आई, ना स्कूटी को कुछ हुआ।

मैं: अरे मॉम कैसे स्कूटी चला रहे हो?

मॉम: अरे बेटा वह तो एक-दम से हो गया, पता नहीं चला कुछ।

मैं: आप स्कूटी चलाओ मैं आपके पीछे बैठता हूं।

मॉम: ठीक है‌।

मॉम आगे बैठ गई और मैं उनके पीछे बैठ गया। अब मॉम धीरे-धीरे स्कूटी को रेस दे रही थी। ऐसे ही धीरे-धीरे मॉम स्कूटी चला रही थी, और मैं उनके पीछे बैठा हुआ था।
आगे जाकर थोड़ा रोड खराब था, तो पीछे से मैं भी हैंडल पकड़ लिया।

मेरे दोनों हाथ मॉम के पेट पर टच हो रहे थे। मैं भी कुछ ऐसा सोचा नहीं, पर मुझे अच्छा लग रहा था। पर मॉम स्कूटी खुद ही चल रही थी।

मॉम: तू हाथ छोड़ दे, मैं खुद ही चला लूंगी अब।

आगे जाकर दो-तीन स्पीड ब्रेकर थे। मॉम ने स्कूटी तो संभाली, पर में उछल कर थोड़ा आगे आ गया था, जिससे मैं मॉम से बिल्कुल चिपक चुका था। अब मॉम की बड़ी गांड मेरे लंड पर थी, और मेरा लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा था। मैंने बहुत कंट्रोल करने की कोशिश करी, पर मेरा लंड आउट ऑफ कंट्रोल हो चुका था। थोड़ा आगे चलने के बाद मैं फुल मूड में था।

शायद मॉम को भी यह महसूस होने लगा था कि मैंने अंदर कुछ नहीं पहना था, और मेरा लंड बिल्कुल खड़ा हो चुका था। ऐसे ही मॉम स्कूटी धीरे-धीरे चला रही थी। फिर आगे अचानक से खराब रोड आ चुका था, जिसमें बहुत सारे गड्ढे थे। मैंने एक हाथ ब्रेक पर रख दिया था। ब्रेक लगाने के बहाने मेरे हाथ मॉम के बूब्स पर टच हो रहे थे।फिर मैं जान-बूझ कर थोड़ी-थोड़ी देर में ब्रेक लगने लगा।

जैसे मैं हाथ आगे लेता ब्रेक पर, मेरा हाथ मॉम के बूब्स पर टच हो जाता। ऐसा मैंने 4-5 बार किया। मॉम को भी शायद पता चल गया था। सुबह का समय था, तो आगे नाश्ते की दुकान आ रही थी। मैं थोड़ा पीछे होकर बैठ गया, और मैं सोचा थोड़ा नाश्ता कर लेते हैं। मैं मॉम को बोला चलो नाश्ता कर लेते हैं

मॉम: हां ठीक है बेटा।

हमने गाड़ी रखी, और हम नाश्ता करने लगे।

मैं: आप तो बहुत अच्छी तरह से चल रही हो, क्या बात है!

मॉम: तू सिखा भी तो अच्छा रहा है ना।

मैं: मैं तो रोज सिखाऊंगा।

मॉम: हां-हां सब पता है तुझे क्यों सिखाना है रोज।

मॉम: मतलब? मैं समझा नहीं?

मॉम: बदमाश। सब पता है मुझे तू क्या कर रहा था पीछे, और बार-बार ब्रेक क्यों मार रहा था।

मैं एक-दम सकपका गया, और मुझे शर्म आने लगी थी। मुझे लगा मॉम को कुछ पता नहीं चलेगा, पर वो तो सब कुछ समझ गई थी। नाश्ता खत्म होने के बाद हम दोनों वापस स्कूटी पर बैठने लगे। मम्मी फिर से स्कूटी अपने हाथों में ली, और मैं एक-दम पीछे हो कर बैठ गया। थोड़ा आगे चले हम। फिर मॉम बोली-

मॉम: बेटा क्या हुआ? इतना पीछे क्यों बैठा है? मुझे सिखा ना सही से।

मैं: आप सही तो चला रही हो। सीख तो गए हो आप।

मॉम: नहीं बेटा, पहले जैसे सिखा ना मुझे पकड़ के।

मुझे समझ नहीं आ रहा था, कि मॉम ऐसा क्यों बोल रही थी। पर मैं तो इसलिए पीछे बैठा था, कि मुझे बहुत शर्म आ रही थी, कि मॉम को सब कुछ पता चल गया था।

मॉम: बेटा तू पहले जैसे बैठा था ना, मुझे अच्छा लग रहा था। प्लीज ऐसे बैठ ना।

मैं थोड़ा सा आगे आया और बोला: बस?

मॉम: नहीं और आगे।

मैं: बस ठीक है?

मॉम: नहीं और आगे।

मैं मॉम से चिपक गया। उनकी गांड मेरे लंड पर आ गई थी फिर से।

मॉम: हां अब ठीक है (फिर मॉम हंसने लगी)।

मैं: क्या हुआ मॉम?

मॉम: आराम से बैठ ना बेटा।

मैं: आराम से ही तो बैठा हूं।

मॉम: अरे मतलब मुझे अच्छे से पकड़ कर बैठ कि गाड़ी इधर-उधर ना गिर जाए।

मैं भी समझ चुका था कि मॉम भी मूड में थी, और उनको कोई दिक्कत नहीं थी। मैं यह भी समझ चुका था कि मॉम मुझे किस तरह से बैठने को बोल रही थी। फिर मैंने भी मॉम को कस कर पकड़ लिया। मैंने दोनों हाथों से मॉम के पेट को पकड़ लिया, और चिपक कर बैठ गया। मेरा लंड वापस फिर से खड़ा होने लगा, और मॉम की गांड में घुसने लगा। अब मैं भी अपना लंड मॉम की गांड में लग रहा था। उसके बाद हम थोड़ी देर में घर आ चुके थे।

जैसे ही मैं घर आया, मेरा मॉम को देखने का नजरिया बदल चुका था। क्योंकि पहले मैं मेरी मॉम को बड़ी इज्जत से देखता था, पर अब मैं मेरी मॉम को चोदना चाहता था। और यही अच्छा मौका था, क्योंकि मेरे पापा भी 5 दिन के लिए बाहर गए हुए थे, और मॉम को भी मुझसे कोई दिक्कत नहीं थी।

दोस्तों आज की कहानी में इतना ही। इससे आगे की सेक्स कहानी अगले पार्ट में।

अगला भाग पढ़े:- मां को स्कूटी चलाना सिखाया-2

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