पिछला भाग पढ़े:- मां के लिए ढूंढा नया पति और मेरे लिए नया बाप-3
दोस्तों सेक्सी कहानी के अगले पड़ाव में आपका बेहद स्वागत है। रमेश पापा खाना खा कर अपने घर चले जाते है, और सुनीता अपने कमरे में, और मैं अपने कमरे में। फिर रमेश पापा का फोन आता है मेरे पास और कहते है-
रमेश पापा: बेटा, सुनीता की चूचियों को दबाने के बाद मेरा लंड बैठ ही नहीं रहा। मेरी जान कब मेरे साथ जिस्मानी संबंध बनाएगी? मुझसे वेट नहीं हो रहा, और सोच रहा हूं कि कल ही अपने मन की बात सुनीता से कह दूं, और उसे कल ही किस्स करूं उसके रसीले होठों पर।
मैं: वैसे बहुत अच्छा सोचा आपने। मन की बात बोल दो, और अगर वो मना करेगी तो मैं भी उसे बोलूंगा कि रमेश अंकल को हां बोल दो। उनसे अच्छा आपको कोई खुश नहीं रख सकता।
रमेश: बेटा सच में तुम्हारे जैसा बेटा पाकर मैं बहुत खुश हूं, और अब बस सुनीता मेरी रांड बन जाए, मजा ही आ जाएगा।
जैसे ही मैं कुछ बोलने वाला होता हूं, तभी सुनीता का फोन रमेश पापा के पास आता है, और हमारा फोन कट जाता है। करीब 5 मिनट बाद रमेश का फोन आता है, और कहता है, कि सुनीता ने उसे आज बोला कि वो उसे (रमेश को) बहुत याद कर रही थी।
मैं: और क्या बोला?
रमेश: सुनीता कह रही थी कि वो मुझसे कुछ कहना चाहती है। लेकिन बोल नहीं पा रही। तो उसने कहा कल अगर फ्री हो तो दोपहर में मिलना, फिर बोलूंगी।
मैं: अच्छा, पापा सच बोलूं तो वो आपसे कहना चाहती है कि उसे अब आपसे प्यार हो चुका है। मैं तो कह रहा हूं कि आप अभी फोन करिए और बोलिए मुझसे सोया नहीं जा रहा, और नींद नहीं आ रही।
रमेश: हां बेटा।
फिर वो सुनीता को फोन करते है, उससे बात करके मुझे वापिस फोन करते है, और कहते है कि: सुनीता ने कहा है अगर आप अभी घर आ सकते हो तो आ जाओ।
मैंने बोला: तो देर कैसी, आ जाओ।
2 मिनट में रमेश मेरे घर आता है, और सुनीता दरवाजा खोलती है। सुनीता सफेद रंग की ट्रांसपेरेंट साड़ी में होती है, जो मैं छुप कर देखता हूं। उसका बदन उसमें से साफ दिख रहा था। मैंने रमेश पापा को कहा था कि फोन पर कॉल चलने देना मुझे सब सुन ना है।
सुनीता: रमेश जी आइए।
रमेश: सुनीता क्या हुआ? कोई प्रॉब्लम?
सुनीता: नहीं बस ऐसे ही कुछ सोच रही थी।
रमेश: अच्छा क्या हुआ बोलो?
सुनीता: साफ-साफ बोलूं तो मुझे ये बताओ आपकी कोई गर्लफ्रेंड है या कोई लड़की नज़र में?
रमेश: नहीं सुनीता, बस एक-दो नॉर्मल ऑफिस में फ्रेंड है। क्या हुआ बोलो?
सुनीता: बस जब से मेरा वो खडूस पति गया है, तब से सिर्फ मैं आपके बारे में सोचती हूं, और सच बताऊं तो आपको पसंद करती हूं।
रमेश: सुनीता सच बोलूं तो मैं भी तुम्हारे बारे में ऐसा ही सोचता हूं।
सुनीता: मेरे पति की वजह से मेरी जिंदगी में कोई सुख नहीं था। अब मौका मिला है तो उसे खोना नहीं चाहती।
रमेश: क्यों वो रोमांटिक नहीं है?
सुनीता: कुछ नहीं उसके बस का। लड़ने के अलावा कुछ नहीं आता।
रमेश: सुनीता आई लव यू।
सुनीता: आई लव यू टू रमेश।
ये सब मैं सुन रहा था और जैसे ही उन्होंने एक-दूसरे को आई लव यू बोला, तो सुनीता कहती है: अगर रमेश आपको बुरा ना लगे तो आज रात आप मेरे घर ही रुक जाओ।
रमेश: बिल्कुल सुनीता।
फिर वो दोनों रूम में जाते है, और रूम अंदर से बंद कर लेते है। अब सुनीता इस बात से बिल्कुल अंजान थी कि मैं ये सब देख रहा था। फिर मैं उसके कमरे के बाहर जाकर खिड़की से सब देखता हूं। तो आगे का नजारा देख कर मैं पागल ही हो गया। सुनीता के हुस्न के जलवे बहुत कड़क और मजेदार थे।
मैं देखता हूं, रमेश मेरी मां सुनीता को दीवार पर लगा कर बहुत जोरों से किस्स कर रहा होता है, और सुनीता भी उसे खूब मजे से चूम रही थी। एक-दूसरे के बदन से बिल्कुल चिपके हुए वो दोनों अपने-अपने होठों से एक-दूसरे में समा चूक थे।
सुनीता ने अपनी जीभ निकाली, और रमेश उसे चूस रहा था। फिर रमेश अचानक सुनीता को पलटता है और उसको पीछे से चूसने लगता है। वो जोर-जोर से सुनीता के चूचों को दबाने लगता है, और सुनीता का ये रंडी का अंदाज मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
फिर रमेश उसकी साड़ी उतारने लगता है, और फिर वो उसका ब्लाउज उतार देता है। वो नीचे से भी साड़ी उतर देता है। अब सुनीता सिर्फ पिंक कलर की ब्रा और रेड कलर की पैंटी में होती है, जिसे देख कर मेरा लंड एक-दम कड़क हो गया। रमेश का लंड भी साफ-साफ उसके पायजामे में से दिख रहा था, कि वो कितना कड़क था। फिर रमेश सुनीता को कस कर पकड़ता है, और बेड पर लिटा देता है। फिर कुत्ते की तरह अपनी जीभ से उसके पूरे बदन को चाटता है। सुनीता उसे बहुत एंजॉय कर रही थी।
फिर सुनीता रमेश की टी-शर्ट उतारती है, और रमेश अपना पायजामा उतारता है।जैसे ही वो अपना पायजामा निकलता है, रमेश का लंड एक-दम कड़क अंदाज में उसके कच्छे में से दिख रहा था। लेकिन सुनीता ने उसी वक्त रमेश का कच्छा भी उतार दिया। अब उसका काला, 6 इंच का लंड इतना टाइट था, कि सुनीता ने अपने हाथ से उसे सहलाया। फिर सुनीता ने अपनी ब्रा उतारी और रमेश ने उसकी पैंटी भी निकाल दी।
सुनीता अब पूरी तरह नंगी थी, और उसके ब्राउन निप्पल, थोड़े हल्के उसकी चूत पर बाल, और उसकी गांड बिल्कुल गोरी थी। रमेश लेटा उसे देख रहा था, और लंड को सहलाता हुआ सुनीता के करीब आता हैं। फिर सुनीता के चूचों को अपने मुंह से चूसने लगता है, और सुनीता भी खूब मजे लूट रही थी।
सुनीता ने अपने चूचों को पूरी तरह रमेश के हवाले कर दिया था, और रमेश उसकी चूत में भी उंगली कर रहा था। फिर सुनीता ने रमेश को बेड पर धक्का दिया, और रमेश लेट गया। फिर सुनीता एक कुत्तिया की तरह आती है, और अपने होठों से रमेश के कड़क लौड़े को चूमती है, और फिर अपनी जीभ से उसको चाटती है।
उसके बाद रमेश उसको वापिस किस्स करके अपना लंड सुनीता के मुंह में डाल देता है और सुनीता पूरी तरह रमेश के लंड में खो चुकी थी। क्या चूस रही थी वो, देख कर ही इतना मजा आ रहा था, सोचो मेरे बाप रमेश को कितना मजा आ रहा होगा?
रमेश जन्नत की सैर कर रहा था। सुनीता ने उसके लंड को अपने मुंह के कब्जे में ले रखा था और फिर सुनीता को इसी अंदाज ने रख कर रमेश उसके पीछे से आता है, और अपनी जीभ को उसकी गांड में डाल देता है।
फिर रमेश सुनीता की गांड को चाट कर उसकी चूत को भी इसी पोजीशन में चाटता है। वो सुनीता के पूरे बदन को चूस-चूस कर सुनीता को अपने हवाले कर लेता है। फिर सुनीता को डॉगी स्टाइल में ही रख कर अपना लंड उसके मुंह में डाल देता है, और सुनीता फिर उसे चूसती है। फिर रमेश अपना लंड उसकी चूत में डाल देता है, जोर-जोर से चोदता है।
सुनीता: आह आह उफ्फ रमेश, मजा आ रहा है। और जोर से, रमेश ऐसे ही आह आह उफ्फ आह आह ओह रमेश तुम्हारा जवाब नहीं।
रमेश: उफ्फ सुनीता तुम क्या मजेदार हो, आह आह।
सुनीता: करते रही रमेश आह उफ्फफ उफ्फ आह।
फिर रमेश लेट के फिर से सुनीता के मुंह को चोदने लगता है और सुनीता अब एक रंडी बन चुकी थी। फिर ऊपर बिठा कर सुनीता की गांड मारता है और उसे खूब चोदता है। रमेश का लंड बहुत कड़क था। सुनीता उसे महसूस कर रही थी।
सुनीता एक पोर्नस्टार की तरह चुद रही थी। फिर सुनीता को लिटा कर, रमेश उसकी चूचियों के बीच अपना लंड डाल कर, उसे चोदता है, और अपना सारा माल उसके बड़े-बड़े खरबूजों पर डाल देता है। सुनीता उसके लंड को फिर से एक बार अपने मुंह से चूसती है।
फिर दोनों एक-दूसरे से चिपक कर सो जाते है। रमेश का लंड बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था। फिर से वो सुनीता को घोड़ी बनाता है और चोदता है। फिर वो उसे खड़ा करके, पीछे से उसकी गांड चाट कर, फिर उसमें लंड घुसा देता है। इस बार अपनी सारी क्रीम उसके चूतड़ों पर डाल देता है।
सुनीता की ये चुदाई देख कर मुझे इतना मजा आया कि मेरा मन था जाकर अभी सुनीता को चूस लूं। मैंने ये सब देख कर जैसे ही अपना लंड छुआ, तो मैं भी झड़ गया। क्योंकि मैं भी वासना की चरम सीमा पर था।
मजा बहुत आया दोस्तों सुनीता की चुदाई देख कर। रमेश का लंड इतना मस्त था कि सुनीता उसे छोड़ना ही नहीं चाह रही थी। और फिर दोनों सो गए। फिर मैं भी गया अपने रूम में। सिर्फ वो सुनीता का रंडी वाला रूप ही मेरे दिलों दिमाग में बस चुका था। क्या माल है सुनीता दोस्तों।
आगे की कहानी के लिए बने रहे मेरे साथ, चुदाई का नया सफर आगे भी यूं ही जारी रहेगा। मेरी मेल: [email protected]